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आवारा जानवरों का दर्द.............

Posted On: 7 Nov, 2015 Others में

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इन दिनों न्यूज़ पेपर्स और टी वी चैनल्स एक न्यूज़ पर कुछ ज्यादा फोकस कर रहे हैं वो है सड़क के यमदूत. इनका इशारा आवारा जानवरों से है. इन लोगो को आवारा जानवर कुछ ज्यादा खतरनाक लगते हैं पर वो लोग नहीं दिखाई देते जो सडको पर इस तरह से वाहन चलाते हैं कि खुद मरते हैं और दुसरे बेकसूर लोगो कि भी जान लेते हैं. भारत में औसतन 14 लोग हर घंटे सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं. देश में हर साल करीब एक लाख बीस हजार से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है. कई हादसे तो ऐसे होते हैं जिनमें पूरा का पूरा परिवार ही खत्म हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत सड़क हादसों में दुनिया का अग्रणी देश है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले जिन 10 देशों की पहचान की है, उनमें भी भारत सबसे ऊपर है. आबादी के लिहाज से चन भले ही दुनिया में पहले नंबर पर हो, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के मामले में भारत उससे भी आगे है. पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में सिग्लन तोड़ने, शराब पीकर वाहन चलाने और तय सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन चलाने के हजारों मामले दर्ज किए जा रहे हैं और यही वह कारण हैं, जिनके कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों की जान जा रही है।
आप भी सोच रहे होंगे कि मैं किस मुद्दे को लेकर बैठा हूँ जबकि मेरे लेख का का शीर्षक तो पशुओं के विषय में है. इसका कारण यह है कि इंसान और पशु दोनों ही इस सृष्टि के जीवन घटक का हिस्सा हैं. पर इंसान तो बिना स्वार्थ के किसी को भी नहीं होता. जैसे- जैसे आबादी और आधुनिकरण बढ़ा वैसे वैसे इंसान और पशुओं के बीच कि दूरियां भी बढती गयी.
एक समय था जब हमारे देश में हाथी, घोड़ो और बैलों का भी हमारे जीवन में एक अहम् हिस्सा हुआ करता था. तभी हमारे देश के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तम्भ कि लाट पर बने चक्र के दोनों ओर बैल और घोड़े कि आकृति को विशेस रूप से अंकित किया गया था. यह तो बात प्राचीन समय कि थी जब इंसानों का काम इन जानवरों के बिना नहीं चलता था. पर आज तो बैल(सांड) शब्द का प्रयोग केवल गाली देनी के लिए ही किया जाता है.
कुछ दिन पहले कि बात है नगर निगम का दस्ता इन जानवरों को बड़ी क्रूरता के साथ पकड़ रहा था. जब मैंने विरोध किया तो एक मोटी तोंद के महाशय बोले “ इन जानवरों को गोली मार देनी चाहिए. आये दिन इनकी वजह से सड़क पर कितनी दुर्घटनाए होती हैं, कही भी बैठ जाते हैं और इनकी आबादी बढती ही जा रही है.” मैंने सोचा कि इंसानों कि आबादी तो लगता दिन प्रतिदिन घटती जा रही है. रोज न जाने कितने लोग स्पीडी बाइक राइडिंग से कितनी दुर्घटनाए करते हैं. तब ऐसे लोगो का तो कोई कुछ
नहीं करता.
दुनिया भर में रोजाना 1 करोड़ से भी ज्यादा जानवरों को मारा जाता है। ये जानवर हैं भैंसे, गाय, सुअर, बकरे, भेड़ आदि। इन जानवरों को क्साइखानो में मारा व काटा जाता है। प्रकृति ने सबको जीने का बराबर अधिकार दिया है। इसलिए जानवरों पर अत्याचार क्यों। क्या उन्हें हमारी ही तरह जिंदगी खुलकर जीने का हक नहीं है। क्या वो नहीं चाहेंगे अपनी मर्जी के मुताबिक अपना जीवन निर्वाह कर सके फिर इनसान अपने स्वार्थ के लिए आखिरकार जीवों पर अत्याचार क्यों करता है। अपनी निजि स्वार्थ की खातिर इनसान कभी जानवरों को पिंजरे में कैद कर लेगा तो कभी दिखावट के लिए जानवरों के साथ ना जाने क्या-क्या करता है। इंसान जानवरों के साथ क्या क्या ज्यादतियां नहीं करता..मिसाल के तौर पर शरीर पर लगाये जाने वाले प्रसाधनों के लिए उनको पीड़ित करना या फिर बूचड़खाने में एक जानवर को दूसरे जानवर की आँखों के सामने बेदर्दी से मार देना, उसका चमड़ा निकालना. आपने कभी किसी जानवर की आँख में देखा है? कहते हैं एक जानवर की आंख दुनिया की सबसे अनमोल जुबां बोलती है, प्रेम और निष्कपटता की बोली. पर क्योंकि जानवर इंसान की भाषा नहीं बोल सकता इसलिए जानवर बेज़ुबान जीव है, इंसान की तरह अपने खिलाफ हो रहे अन्याय के प्रति वो ना तो आवाज़ उठा सकता है और ना ही उसके खिलाफ हाथ उठा सकता है. कुल मिला कर आजकल वैसे भी तो जानवरों की कई प्रजातियां खत्म होने के कगार पर है पर फिर भी हम लोग इन प्राणियों का महत्व नहीं समझ रहे हैं ये गलत है. जानवरों की मदद कर रही संस्थाये जैसे की पेटा, आईडीए इंडिया आदि को बडी मदद मिलनी चाहिये ताकि सही पैसा सही हाथों में जाये और काम आये | साथ ही भारत की एक ए॓सी हेल्पलाईन या आल इंडिया टोल फ्री नंबर भी हो जहां कोई भी जानवरों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ शिकायत लिखवा सके या बीमार जानवरों की मदद हेतु दरखास्त दे सके |

from वत्सल वर्मा , कानपुर

VATSAL VERMA (freelancer journalist cum news correspondent/Bureau Chief) in Kanpur ( U.P.) Mob- 08542841018

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