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नाबालिग चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं.

Posted On: 7 Apr, 2015 Others में

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इन दिनों सड़कों पर नाबालिग चालकों की भरमार हो गयी है। वे सड़कों पर
दोपहिया से लेकर ऑटो और ट्रैक्टरों को सरपट दौड़ाते नजर आते हैं। ऐसे कम
उम्र के चालक न केवल यातायात संबंधी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं,
बल्कि सड़क दुर्घटना के कारक भी बन रहे हैं। वे खुद दुर्घटना के शिकार
होने के साथ-साथ दूसरों को भी अपनी चपेट में ले लेते हैं। ऐसे चालकों पर
न तो पुलिस प्रशासन की ओर से नकेल कसी जा रही है और न ही परिवहन विभाग ही
गंभीरता दिखा रहा है। अभिभावकों की ओर से भी बच्चों को पूरी छूट मिली हुई
है। दूसरी ओर स्कूल-कॉलेज जानेवाले किशोर-किशोरियां भी इसमें पीछे नहीं
हैं। ये प्रतिदिन बाइक और स्कूटी से स्कूल आते-जाते हैं। उनकी रफ्तार भी
कम नहीं होती। वे सड़कों पर आड़े-तिरछे इस स्टाइल से बाइक चलाते हैं मानों
कोई फिल्मी स्टंट कर रहे हों। इसी क्रम में या तो वे दुर्घटना के शिकार
हो जाते हैं या फिर किसी दूसरे को अपनी चपेट में ले लेते हैं। स्कूल में
पढ़ने वाले बालकों का आटो बाइक चलाना सड़क पर फर्राटे भरना, अपने दोस्तों
से आगे निकलना, ओवरटेकिंग करना देखने वालों के लिए शोचनीय विषय तो अवश्य
ही है और इस तरह का हैरतअंगेज करतब कितनी जिन्दगियों के लिए खतरा बन रहे
हैं। इस पर समाज के हर वर्गीय लोगों को सोचना चाहिए विशेष तौर पर हर
माँ-बाप को सजग रहने की जरूरत है। किशोर उम्र के बालक/बालिकाएँ उतनी
परिपक्व नहीं होती लेकिन अभिभावक, टीचर, समाज के जिम्मेदार लोगों और
परिवहन विभाग को इस आम होती समस्या पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम
उठाने ही होंगे। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में किशोर उम्र के लड़कों द्वारा की
जाने वाली अनियंत्रित आटो बाइक रेस पर नियंत्रण लगाने के लिए घर-परिवार,
समाज, शिक्षालय, शिक्षक और सरकारी तन्त्र की जिम्मेदारी बनती है फिर भी
सामाजिक संगठनों के सक्रिय सदस्यों ने आज तक कोई पहल नहीं किया है। बताया
जाता है कि आटो बाइक रेस करने वाले ये लड़के/लड़कियाँ यातायात के नियमों के
बारे में शायद कुछ भी नहीं जानते। इसके लिए विद्यालय जिम्मेदार है। शायद
कुछ भी स्कूलों से आते-जाते समय ये बालक भीड़ भरे क्षेत्रों, सड़कों, संकरी
गलियों में फिल्मी स्टंट करते देखे जा सकते हैं। जी हाँ अनियंत्रित
रफ्तार, तीन से चार सवारियाँ बिठाए इनकी मोटर बाइक संचालन रील लाइफ स्टंट
न होकर रीयल लाइफ स्टंट सीन सा दिखता है।
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अपने बच्चों को महंगी शिक्षा ग्रहण कराने
वाले अभिभावक भी अपना स्टेटस सिम्बल ऊँचा रखने के लिए बच्चों को मोटर
बाइक मुहैय्या करा देते हैं। आठवीं से लेकर इण्टर तक की शिक्षा ग्रहण
करने वाले धनी माँ-बाप की औलादें बाइक (साइकिल) से ना जाकर मोटर बाइक से
विद्यालय गमनागमन करते हैं। जिस स्थान पर 20 कि.मी. की स्पीड होनी चाहिए
वहाँ इनकी मोटर बाइक के स्पीडो मीटर की सूई 80-85 पर रहती है। स्कूलों को
जाने और वापसी के समय इन स्टंट टीनएज मैन बने बच्चों से राहगीर भी डरे
रहते हैं, और असमय काल का ग्रास बनने से कतराते हैं इसलिए सुरक्षित स्थान
पर खड़े होकर इनकी तेज रफ्तार आटो बाइक के गुजर जाने का इंतजार करते हैं।
बताते हैं कि कुछ किशोरों ने गलत उम्र दिखाकर परिवहन विभाग से ड्राइविंग
लाइसेन्स भी प्राप्त कर लिया है, लेकिन हेल्मेट पहनना और यातायात के
नियमों की भरपूर जानकारी रखना अपनी तौहीन समझते हैं। यदि स्टेटस सिम्बल
पर ही विशेष ध्यान देना है तो धनी वर्गीय अभिभावक अपने चार पहिया आटो
वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजें और घर वापस मँगाए। ऐसा करने से उनकी
हैसियत/इकबाल बुलन्द होगी और साथ ही बच्चे सुरक्षित घर से स्कूल और स्कूल
से घर पहुँच जाया करेंगे। बहरहाल बच्चों को मोटर बाइक चलाने से रोकना
नितान्त आवश्यक हो गया है क्योंकि किशोरवय के युवा बगैर लाइसेन्स और
हेल्मेट के दो पहिया मोटर वाहनों से फर्राटा भरते हुए खुद तो जोखिम में
होते ही हैं, साथ ही दूसरों के लिए भी खतरा बने हुए हैं। इसके लिए
अभिभावकों को संजीदा होना पड़ेगा ताकि उनके बच्चे स्वयं सुरक्षित रहें और
दूसरों के लिए भी हादसे का सबब न बनें।……….

from VATSAL VERMA (freelancer journalist cum news
correspondent/Bureau Chief) Mob- 8542841018

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