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valentine day special article ... ....जो मिल गया बस वही अपना है.............

Posted On: 13 Feb, 2015 Others में

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प्रेम अब भी हमारी कल्पना का सबसे नाजुक, खूबसूरत और अनूठा हिस्सा है।
वक्त चाहे कितना भी बदल जाए, हम कितने ही आधुनिक, तेज और मशीनी हो जाएं,
लेकिन प्रेम का अहसास एक-सा ही होता है। कहने को तो कहा जा सकता है कि
समाज की दूसरी चीजों की तरह की प्रेम या रोमांस भी टाइम बीईंग हो गया है,
लेकिन हकीकत ये है कि जीवन में जब प्रेम जैसा प्रेम दस्तक देता है तो
अच्छे-अच्छे तीसमार खां इसकी मार से बच नहीं सकते हैं।
आजकल फेसबुक पर प्यार होना युवाओं का क्रेज बन गया है. ज्यादातर लड़के
फेसबुक पर प्रोफाइल ही लड़कियां पटाने के लिए बनाते हैं. लेकिन व्र्चुअल
दुनिया का यह प्यार हमेशा सफल नहीं होता. यह प्यार कई बार बड़े धोखे लेकर
आता है.झूठे प्यार के दिखावे करने वालों से हमेशा बचना चाहिये। ऐसे लोगों
का प्यार पानी के बुलबुले जैसा होता है। अपने मतलब और आपके ख़ुबसूरती से
प्यार करने वालों की कमी नही होगी। अग़र ऐसे लोगों से मेलजोल आप बढ़ाते
है तो आख़री में आपको ही पश्ताना पड़ेगा क्योंकि ऐसे प्रेम करने वालों का
एक ही मक्सद होता है आपसे मीठी बात करना, आपके साथ घूमना-फिरना, आपके साथ
रोमांस करना या फिर आपके जिस्म तक पहुचना। ऐसे लोग बहुत खूबसूरत भी हो
सकते है मग़र इनके प्यार का कोई मतलब नही होता। जो इंसान दुसरों के लिये
अपनी ज़िंदगी जीता है वही सच्चे प्यार को समझ पाता है। जरुरी नही कि
जिनके पास गाड़ी, मोटर, अच्छे कपड़े और दिखावा हो उनके दिल में आपके लिये
प्यार ही हो। प्यार कभी दिखावा नही बल्कि ख़ामोशी है जो प्यार करने वाले
को ही सुनाई देता है। प्यार को कहने की या इज़हार की ज़रुरत नही होती इसे
महसूस किया जाता है। किसी के आँखों में भी सच्चे प्यार को पहचाना जा सकता
है। प्यार की ज़रुरत तो हर इंसान को है मग़र आज इसका भी बाजारीकरण हो गया
है। आज प्यार के नाम पर लोग धोखा, इमोशनल ब्लैकमेल, स्वार्थसिध्दी, हवस
और दुसरे के ज़िन्दगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके चलते आज प्यार का
सच्चा रुप और रंग देखना बहुत मुश्किल हो गया है। इसमें मारे वो लोग जाते
हैं जो सच्चा प्यार करते हैं और जिन्हे सच्चे प्यार की तलाश है। आज अग़र
कोई सच्चा प्यार करे तो भी प्रेमिका को विश्वास नही होता क्योंकि उसको
प्यार का दिखावा करने वाले हर दिन उसके आगे-पिछे घुमते रहते हैं।
आजकल ब्वॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड रखना स्टेटस सिम्बल हो गया है. आज की
लड़कियां कीमती उपहार और दावत के लोभ में किसी की वैलंटाइन बन जाती है.
लिव इन रिलेशन में शरीर की पवित्रता को दांव पर लगा कर एक दूसरे को
आजमाया जाता है. क्या किसी को परखने के लिए बौद्धिक और वैचारिक कसौटियां
काफी नहीं? फिर देह सम्बंधों को अहमियत क्यों ? इस अनैतिक नयी सोच के
खिलाफ, समस्त जनचेतना को एकजुट हो जाना चाहिए . यही समय की मांग भी है.
इंस्टेंट कॉफी, फास्ट फूड, फेसबुक, ट्विटर और नेट चैट के इस युग में
प्रेम का अर्थ बदल गया है, कम-से-कम युवाओं के लिए। हालांकि प्यार और
रोमांस के प्रति आकर्षण आज भी मौजूद है, लेकिन आज का युवा कमिटमेंट से
डरता है। आज प्रेम और रोमांस का अर्थ युवाओं के लिए सिर्फ इतना ही रह गया
है कि अपने-अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के साथ हैंग आउट करना, फिल्म
जाना, पब में बैठकर गप्प लड़ाना, गिफ्ट का आदान-प्रदान करना, कुछ देर के
लिए किसी कोने में खो जाना और फिर ब्रेकअप कर दूसरे साथी की तलाश में जुट
जाना। प्यार में कोई बुराई नही है, बस मन सच्चा होना चाहिए, जो आजकल के
युवाओ में बहुत कम देखने को मिलता है । आजकल की युवा पीढ़ी प्यार के सही
मायनेनहीं समझ पा रही है, उनके दिमाग में हवस भरी पडी है, वे प्यार को
खिलोने की तरह इस्तेमाल करते है और फिर एक को छोडकिसी और के साथ हो जाते
है,ऐसे लोग प्यार की पवित्रता को ठेस पहुचा रहे है। और कहते है ना घुन क
साथ घेहू भी पिस्सा जाता है, उसी तरह सच्चे प्यार करने वाले भी शक की
निगाह से देखे जाते है। और सच बात तो ये है कि आज की युवा पीढ़ी प्यार
करना तो जानती है, लेकिन उनमें वह सहनशक्ति , वह विश्वास नही है जो प्यार
के रिश्ते को निभाने में अहम भूमिका निभाता है। प्यार का रिश्ता विश्वास,
त्याग, सहनशक्ति की नीव पर खड़ा होता है। लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी अपनी
शर्तो पर प्यार हासिल करना चाहती है। जितनी जल्दी प्यार के रिश्ते में
बंधते है, उतनी ही जल्दी प्यार के रिश्ते से आज़ाद भी होना चाहते है।
आजकल बबलगम रोमांस का दौर है और इसमें लड़के और लड़किया दोनों ही की सोच
एक जैसी है। जिस तरह आप बबलगम चबाते रहते हैं और जब मन भर जाता है तब उसे
थूक देते हैं, उसी तरह रोमांस का भी यही किस्सा है। इसलिए आज के युग में
कमिटमेंट का सिर्फ यही मतलब रह गया है कि फिल्में जाओ, पब और पार्टी में
जाओ और अच्‍छे दोस्तों की तरह चिलआउट करो। कुछ समय एक-दूसरे के साथ रहने
के बाद नए डेट की तलाश पूरे जोश से शुरू हो जाती है। मनोवैज्ञानिकों के
अनुसार इस बदलते दृष्टिकोण या व्यवहार का मुख्य कारण व्यक्तिगत
स्वतंत्रता है, क्योंकि कोई भी अपनी आजादी नहीं खोना चाहता। समय बीतने के
साथ-साथ हर मनुष्य को यह सीख जाना चाहिए कि बहुत सारी कही जाने वाली
बातों का कोई अर्थ नहीं होता है। हर बात को दिल से लगाएंगे और उसे जीवन
में रूपांतरित होता देखना चाहेंगे तो निराशा ही हाथ लगेगी क्योंकि एक तो
बहुत कुछ संभव नहीं होता, दूसरा सामने वाला कितना गंभीर है वह भी एक
महत्वपूर्ण बिंदु है। कई बार आप अपने मन पर इतना भरोसा करते हैं कि उसे
सही साबित करने के लिए दूसरे पर भरोसा करते जाते हैं। आपको लगता है कि
आपका मासूम व सच्चा मन कैसे गलत हो सकता है। जैसे एक बच्चा जान-पहचान
वालों बड़े की चिकनी-चुपड़ी बातों पर भरोसा किए बिना नहीं रह पाता है चाहे
उसके साथ कुछ भी अनहोनी घटने वाली हो, ठीक उसी प्रकार कुछ लोग अपने
रिश्ते में कभी बड़े नहीं हो पाते हैं। वह अपने साथी पर भरोसा करते हैं,
उसे दिल व जान से अपना मानते हैं और सामने वाले से समय-समय पर उदासीनता व
अलगाव के कारण आहत होते हैं।
हालांकि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आज के सारे रिश्ते बबलगम की ही तरह
हो गए हैं। आज भी ऐसे युवाओं की कमी नहीं है जो प्रेम और रोमांस को
गंभीरता से लेते हैं। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है सही साथी की तलाश।
और तलाश खत्म होने पर जब उनका आपसी तालमेल बैठता जाता है तो फिर पीछे
मुड़कर देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
दोनों के लिए रिश्ते का मतलब विश्वास, कमिटमेंट और शादी रहता है। इसलिए
अगर प्यार सच्चा है तब कमिटमेंट उसका अहम हिस्सा होता है।

from वत्सल वर्मा , कानपुर (freelancer journalist cum news correspondent/Bureau
Chief) in Kanpur ( U.P.) Mob- 08542841018

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