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संकल्प लेने के साथ मानसिकता बदलने की भी जरूरत .......

Posted On: 7 Feb, 2015 Others में

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आपने अखबारों में, टीवी न्यूज में ‘बेटी बचाओ’ अभियान के बारे में पढ़ा
और सुना होगा। यूं तो बहुत से एनजीओ, पीएसए (पब्लिक सर्विस अनाउंसमेंट),
डॉक्यूमेंट्री द्वारा इसके लिए लोगों को जागृत करने के प्रयास किए जाते
रहें हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न इलाकों में जाकर कन्या
भ्रूण हत्या को रोकने के प्रति लोगों को जागरुक बनाना है, विशेषकर
महिलाओं को जिससे वे इस घिनौने, दंडनीय अपराध के खिलाफ आवाज उठा सकें।
क्योंकि जब तक समाज के लोग नहीं चेतेंगे और इस के ‍खिलाफ आवाज नहीं
उठाएंगे तब तक न जाने कितनी ही मासूमों का गर्भ में ही गला घोंटा जाता
रहेगा और अगर गलती से वे इस दुनिया में आ भी गई तो उनकी नन्ही आंखों को
खुलने से पहले ही बंद किया जाता रहेगा।
भारत के लोग धन की प्राप्ति, समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की आराधना करते
हैं, ज्ञान, विवेक के लिए मां सरस्वती की उपासना करते हैं, अपने शत्रुओं
पर विजय पाने के लिए मां काली को प्रसन्न करते हैं। लेकिन जब यही देवियां
लड़की के रूप में उनके घर में आना चाहती हैं तब यह बात उनको नागवार ठहरती
है और उन्हें वे गर्भ में ही मौत के घाट उतार देते हैं। उन्हें तो ये
देवियां सिर्फ मूर्तियों और फोटो में ही अच्छी लगती हैं, भला असल जिंदगी
में उनका क्या काम। देवियों समान ये बच्चियां उनके लिए महज एक बोझ, एक
पीड़ा बन कर रह जाती हैं। आज नारी घर की चार दीवारी में बंद एक अबला नहीं
बल्कि एक सशक्त व्यक्त्तिव की मालकिन बन गई है। खेल जगत, व्यापार जगत,
फिल्म जगत, राजनीति, वकालत, चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में नारी शक्ति
का भी बोलबाला है। सरकार भी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास
करती रहती है। साथ ही कई सरकारी महाविद्यालयों और संस्थानों में भी
महिलाओं के लिए कुछ सीट्स रिजर्व रखी
जाती हैं ताकि महिलाएं उच्च शिक्षा वौर रोजगार प्राप्त कर सकें। इतना सब
होने के बावजूद भी कई लोग इसी सोच से ग्रसित हैं कि लड़का ही बेहतर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लड़कियों के साथ भेदभाव रोकने के
लिए एक नए अभियान की शुरुआत की है.’बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ’ नाम के इस
अभियान का ज़ोर ख़ासतौर से कन्या भ्रूणहत्या को रोकने पर है. ये सब तो हो
रहा है पर इससे क्या समाज की मानसिकता पर फर्क पड़ेगा ? शायद यह कहना बहुत
मुश्किल है . अभी कुछ दिनों पहले की बात है मै हॉस्पिटल में था . एक औरत
एक सज्जन से पूँछ रही थी की कल आपकी बीवी की डिलीवरी थी क्या हुआ ? उस पर
उस व्यक्ति बड़े धीमे से कहा लड़की हुई . इतना सुनते ही उस औरत का मुह बन
गया और वो उस व्यक्ति से सांत्वना देते हुए लहजे में बोली “ जो भी हुआ सब
भगवन की मर्जी है ,हम क्या कर सकते हैं “ वो औरत तो इस तरह से बोल रही थी
की उस व्यक्ति के घर में कोई जैसे मर गया हो . आज भी जब किसी के घर में
लड़का होता है तो हिजड़े गाने बजने आ जाते हैं पर लड़की पैदा होते ही
सन्नाटा हो जाता है . ऐसा हम बहुधा अपने समाज में देखते है . ये सब तो तब
तक चलता रहेगा जब तक हम सब अपनी मानसिकता नहीं बदलेंगे .
सरकार ने जो यह अभियान चलाया है बेटी बचाओ यह कई जगह तर्कसंगत तो बैठता
है पर कई जगह तर्कसंगत नहीं है बेटियों को यहाँ अभिशाप समझा जाता है और
यहाँ सभी को लड़के चाहिए में यह सोचता हूँ की आखिर हमारा समाज बेटियों को
क्यों नहीं चाहता आखिर क्या कारन है यहाँ पर बेटियों को पैदा होते ही मार
दिया जाता है यहाँ पर लोग लड़कियों को बोझ समझते हैं जो यह अभियान चलाया
है बेटी बचाओ यह अभी कई जगह तक पंहुचा नहीं है अब बेटियों का क्या दोष जो
उन्हें मार दिया जाता है बेटियों को तो जीने देना चाहिए बेटियां जिसके घर
में हुई समझो लक्ष्मी आ गयी पर भारत में यह सब मानता क्यों नहीं अब
बेटियों को बचाना सरकार का भी काम है और हमारा भी हमें ही पुरे देश में
अच्छी तरह से जागरूकता फैलानी होगी तभी यह अभियान तर्कसंगत बैठेगा अब
कहते हैं की बेटियों को मत मारो नहीं तो सजा मिलेगी पर आजकल तो कानून में
ही सख्ती नहीं है जो सरकार कहती है की सजा मिलेगी वो मिलनी भी चाहिए
कानून सख्त होने चाहिए कानूनों को सख्त करना सरकार का काम है कानून में
कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए सजा देनी ही चाहिए आजकल समाज में
अस्पताल भी लिप्त हैं इस धंधे में अस्पताल में तो बाहर से यह होअर्डिंग
लगा रहता है की कन्या की हत्या करना दंडनीय है पर वह भी इसमें मिले रहते
है बेटी बचाओ अभियान तभी तर्कसंगत होगा जब सरकार अपने कानूनों में सख्ती
करे तभी यह अभियान न्यायसंगत और तर्कसंगत होगा वरना नहीं…..
from वत्सल वर्मा
(freelancer journalist cum news correspondent/Bureau
Chief) in Kanpur ( U.P.) Mob- 08542841018

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